यरुशलम (इब्रानी: יְרוּשָׁלַיִם, अरबी: اَلْقُدْس) मृत सागर के पास दक्षिणी लेवंट में स्थित एक शहर है। यह दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है, जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ की मान्यता प्राप्त नहीं हुई है, यह शहर यहूदी पंथ, ईसाई पंथ और इस्लामी पंथ, तीनों की पवित्र नगरी है। दोनों इस्राइल और फ़िलिस्तीन यरुशलम को अपने राजधानी मानते हैं, परंतु कोई भी दावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं माना गया है। यहीं यहूदियों की परमपवित्र पश्चिमी दीवार है। ये शहर ईसा मसीह की कर्मभूमि रहा है। यहीं से मुहम्मद मीराज के सफ़र पर गए था।
यहाँ सर्वप्रथम यहूदी पंथ की शुरुआत मूसा के द्वारा की गयी थी| फिर ये स्थान ईसा मसीह ने यहाँ से ही इसाई पंथ की शुरुआत करी | जिसके बाद लगभग 7वी शताब्दी में येरूशलम से ही हज़रत मोहम्मद द्वारा मेराज का सफ़र शुरू किया गया |
राजधानी होने के अलावा यह एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल भी है। इस शहर में 158 गिरिजाघर तथा 73 मस्जिदें स्थित हैं। इन गिरिजाघरों और मस्जिदों के अलावा भी यहाँ देखने लायक बहुत कुछ है। , अल अक्सा मस्जिद, डोम ऑफ़ द रॉक, मुसाला मरवान, वेस्टर्न वॉल, डे...आगे पढ़ें
यरुशलम (इब्रानी: יְרוּשָׁלַיִם, अरबी: اَلْقُدْس) मृत सागर के पास दक्षिणी लेवंट में स्थित एक शहर है। यह दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है, जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ की मान्यता प्राप्त नहीं हुई है, यह शहर यहूदी पंथ, ईसाई पंथ और इस्लामी पंथ, तीनों की पवित्र नगरी है। दोनों इस्राइल और फ़िलिस्तीन यरुशलम को अपने राजधानी मानते हैं, परंतु कोई भी दावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं माना गया है। यहीं यहूदियों की परमपवित्र पश्चिमी दीवार है। ये शहर ईसा मसीह की कर्मभूमि रहा है। यहीं से मुहम्मद मीराज के सफ़र पर गए था।
यहाँ सर्वप्रथम यहूदी पंथ की शुरुआत मूसा के द्वारा की गयी थी| फिर ये स्थान ईसा मसीह ने यहाँ से ही इसाई पंथ की शुरुआत करी | जिसके बाद लगभग 7वी शताब्दी में येरूशलम से ही हज़रत मोहम्मद द्वारा मेराज का सफ़र शुरू किया गया |
राजधानी होने के अलावा यह एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल भी है। इस शहर में 158 गिरिजाघर तथा 73 मस्जिदें स्थित हैं। इन गिरिजाघरों और मस्जिदों के अलावा भी यहाँ देखने लायक बहुत कुछ है। , अल अक्सा मस्जिद, डोम ऑफ़ द रॉक, मुसाला मरवान, वेस्टर्न वॉल, डेबिडस गुम्बद आदि। यहाँ के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।
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