色拉寺
( सेरा मठ )सेरा मठ तिब्बत स्थित एक प्रसिद्ध बौद्ध मठ है। यह ल्हासा से केवल दो किमी की दूरी पर स्थित है। यह तिब्बत की तीन महान् गेलुग विश्वविद्यालय मठों में से एक है।
इसके नाम की उत्पत्ति का आधार इस तथ्य को दिया जाता है कि इसके निर्माण के समय इस मठ के पीछे की पहाड़ी खिलते हुए जंगली गुलाबों (या तिब्बती में "सेरा") से ढकी हुई थी। (एक वैकल्पिक मान्यता के अनुसार वह स्थान रास्पबेरी झाड़ियों से घिरा हुआ था जिसे तिब्बती भाषा में 'सेवा' कहते है और इन झाड़ियों ने बाड़ का काम किय जिसे तिब्बरी में 'रवा' कहते हैं।)
मूल सेरा मठ द्वारा कोई 19 आश्रमों का निर्माण किया गया था जिनमें से चार में बौद्ध भिक्षुणियाँ रहतीं थीं। ये सभी ल्हासा के उत्तर में तलहटी में स्थित हैं।
सेरा मठ का निर्माण १४१९ में जामचेन चोजेय ने किया था। सन 1959 में ल्हासा में जो विद्रोह हुआ था, उसमें सेरा मठ को गंभीर क्षति हुई थी, इसके महाविद्यालयों को नष्ट कर दिया गया था और सैकड़ों भिक्षु मारे गए थे।
जब दलाई लामा ने भारत में शरण ले ली, उसके बाद हमले में बचे हुए सेरा के कई भिक्षु भारत के मैसूर के बायलाकुप्...आगे पढ़ें
सेरा मठ तिब्बत स्थित एक प्रसिद्ध बौद्ध मठ है। यह ल्हासा से केवल दो किमी की दूरी पर स्थित है। यह तिब्बत की तीन महान् गेलुग विश्वविद्यालय मठों में से एक है।
इसके नाम की उत्पत्ति का आधार इस तथ्य को दिया जाता है कि इसके निर्माण के समय इस मठ के पीछे की पहाड़ी खिलते हुए जंगली गुलाबों (या तिब्बती में "सेरा") से ढकी हुई थी। (एक वैकल्पिक मान्यता के अनुसार वह स्थान रास्पबेरी झाड़ियों से घिरा हुआ था जिसे तिब्बती भाषा में 'सेवा' कहते है और इन झाड़ियों ने बाड़ का काम किय जिसे तिब्बरी में 'रवा' कहते हैं।)
मूल सेरा मठ द्वारा कोई 19 आश्रमों का निर्माण किया गया था जिनमें से चार में बौद्ध भिक्षुणियाँ रहतीं थीं। ये सभी ल्हासा के उत्तर में तलहटी में स्थित हैं।
सेरा मठ का निर्माण १४१९ में जामचेन चोजेय ने किया था। सन 1959 में ल्हासा में जो विद्रोह हुआ था, उसमें सेरा मठ को गंभीर क्षति हुई थी, इसके महाविद्यालयों को नष्ट कर दिया गया था और सैकड़ों भिक्षु मारे गए थे।
जब दलाई लामा ने भारत में शरण ले ली, उसके बाद हमले में बचे हुए सेरा के कई भिक्षु भारत के मैसूर के बायलाकुप्पे आ गये थे। कुछ समय बाद भारत सरकार की सहायता से उन लोगों ने सेरा मठ जैसा एक दूसरा मठ निर्मित किया जिसमें सेरा मी और सेरा जे महाविद्यालय के साथ ही मूल मठ के समान एकत्रीकरण के लिये एक विशाल हॉल भी बनाया। अब यहाँ 3000 या इससे अधिक भिक्षु रहते हैं। इन लोगों ने अन्य देशों में भी बौद्ध धर्म-प्रसार का काम किया है वहाँ धर्म केंद्रों की स्थापना की है।
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