तक्षशिला
तक्षशिला (उर्दू: ٹَیکْسِلا, अंग्रेज़ी: Taxila) पाकिस्तानी पंजाब के पोठोहार क्षेत्र में स्थित एक शहर है, जो प्राचीन भारत में गान्धार देश की राजधानी और शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था। यहाँ का विश्वविद्यालय विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालयों में शामिल है। जैन एवं बौद्ध दोनों के लिए का था। अजातशत्रु, बिम्बिसार,वसुबंधु ने शिक्षा ग्रहण किया था जो पुर्ण रूप से बौद्ध विश्विद्यालय था जो प्राचीन भारत के नाग लोगों के महान चक्रवर्ती सम्राट तक्षक के नाम पर बना है। 405 ई में फाह्यान यहाँ आया था।
ऐतिहासिक रूप से यह तीन महान मार्गों के संगम पर स्थित था-
(1) उत्तरापथ - वर्तमान ग्रैण्ड ट्रंक रोड, जो गन्धार को मगध से जोड़ता था,
(2) उत्तरपश्चिमी मार्ग - जो कापिश और पुष्कलावती आदि से होकर जाता था,
(3) सिन्धु नदी मार्ग - श्रीनगर, मानसेरा, हरिपुर घाटी से होते हुए उत्तर में रेशम मार्ग और दक्षिण में हिन्द महासागर तक जाता था।
वर्तमान समय में तक्षशिला, पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के रावलपिण्डी जिले की एक तहसील तथा महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है जो इस...आगे पढ़ें
तक्षशिला (उर्दू: ٹَیکْسِلا, अंग्रेज़ी: Taxila) पाकिस्तानी पंजाब के पोठोहार क्षेत्र में स्थित एक शहर है, जो प्राचीन भारत में गान्धार देश की राजधानी और शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था। यहाँ का विश्वविद्यालय विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालयों में शामिल है। जैन एवं बौद्ध दोनों के लिए का था। अजातशत्रु, बिम्बिसार,वसुबंधु ने शिक्षा ग्रहण किया था जो पुर्ण रूप से बौद्ध विश्विद्यालय था जो प्राचीन भारत के नाग लोगों के महान चक्रवर्ती सम्राट तक्षक के नाम पर बना है। 405 ई में फाह्यान यहाँ आया था।
ऐतिहासिक रूप से यह तीन महान मार्गों के संगम पर स्थित था-
(1) उत्तरापथ - वर्तमान ग्रैण्ड ट्रंक रोड, जो गन्धार को मगध से जोड़ता था,
(2) उत्तरपश्चिमी मार्ग - जो कापिश और पुष्कलावती आदि से होकर जाता था,
(3) सिन्धु नदी मार्ग - श्रीनगर, मानसेरा, हरिपुर घाटी से होते हुए उत्तर में रेशम मार्ग और दक्षिण में हिन्द महासागर तक जाता था।
वर्तमान समय में तक्षशिला, पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के रावलपिण्डी जिले की एक तहसील तथा महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है जो इस्लामाबाद और रावलपिण्डी से लगभग 32 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित है। ग्रैंड ट्रंक रोड इसके बहुत पास से होकर जाता है। यह स्थल 1980 से यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में सम्मिलित है। वर्ष 2010 की एक रिपोर्ट में विश्व विरासत फण्ड ने इसे उन 12 स्थलों में शामिल किया है जो अपूरणीय क्षति होने के कगार पर हैं। इस रिपोर्ट में इसका प्रमुख कारण अपर्याप्त प्रबन्धन, विकास का दबाव, लूट, युद्ध और संघर्ष आदि बताये गये हैं।
नई टिप्पणी जोड़ें