Cráter de Chicxulub
( चिकशुलूब क्रेटर )चिकशुलूब क्रेटर (Chicxulub crater) मेक्सिको के युकातान प्रायद्वीप के नीचे दबा हुआ एक प्रहार क्रेटर है। इस क्रेटर का केन्द्र चिकशुलूब नामक मेक्सिकी शहर के समीप स्थित है जिस पर क्रेटर का नाम पड़ा। यह आधा तो ज़मीन पर और आधा मेक्सिको की खाड़ी में डूबा हुआ है। इसका व्यास (डायामीटर) १८० किमी और गहराई क़रीब २० किमी है। इतने बड़े आकार के कारण यह पृथ्वी पर मौजूद सबसे बड़े प्रहार क्रेटरों में गिना जाता है। अनुमान लगाया गया है कि जिस क्षुद्रग्रह के प्रहार से यह बना वह कम-से-कम १० किमी व्यास के आकार का रहा होगा। यहाँ की स्थानीय राख व पत्थर की जाँच से अंदाज़ा लगाया गया है कि इसे बनाने वाला प्रहार आज से लगभग ६.६ करोड़ साल पूर्व गुज़रा।
क्रेटर की ६.६ करोड़ वर्षों की अनुमानित आयु ठीक उस समय से मिलती है जब चाकमय कल्प (Cretaceous Period, क्रीटेशस काल) ख़त्म हुआ और पैलियोजीन कल्प (Paleogene Period) शुरू हुआ। यह के-पीजी सीमा से भी मेल खाता है जो क्रीटेशस कल्प और पैलियोजीन कल्प की भुविज्ञानिक सीमा है। इन सुराग़ों के कारण चिकशुलूब क्रेटर को क्रीटेशस-पैलियोजीन व...आगे पढ़ें
चिकशुलूब क्रेटर (Chicxulub crater) मेक्सिको के युकातान प्रायद्वीप के नीचे दबा हुआ एक प्रहार क्रेटर है। इस क्रेटर का केन्द्र चिकशुलूब नामक मेक्सिकी शहर के समीप स्थित है जिस पर क्रेटर का नाम पड़ा। यह आधा तो ज़मीन पर और आधा मेक्सिको की खाड़ी में डूबा हुआ है। इसका व्यास (डायामीटर) १८० किमी और गहराई क़रीब २० किमी है। इतने बड़े आकार के कारण यह पृथ्वी पर मौजूद सबसे बड़े प्रहार क्रेटरों में गिना जाता है। अनुमान लगाया गया है कि जिस क्षुद्रग्रह के प्रहार से यह बना वह कम-से-कम १० किमी व्यास के आकार का रहा होगा। यहाँ की स्थानीय राख व पत्थर की जाँच से अंदाज़ा लगाया गया है कि इसे बनाने वाला प्रहार आज से लगभग ६.६ करोड़ साल पूर्व गुज़रा।
क्रेटर की ६.६ करोड़ वर्षों की अनुमानित आयु ठीक उस समय से मिलती है जब चाकमय कल्प (Cretaceous Period, क्रीटेशस काल) ख़त्म हुआ और पैलियोजीन कल्प (Paleogene Period) शुरू हुआ। यह के-पीजी सीमा से भी मेल खाता है जो क्रीटेशस कल्प और पैलियोजीन कल्प की भुविज्ञानिक सीमा है। इन सुराग़ों के कारण चिकशुलूब क्रेटर को क्रीटेशस-पैलियोजीन विलुप्ति घटना से सम्बन्धित माना जाता है जिसमें विश्व भर के डायनासोर मारे गये और पृथ्वी की उस समय की लगभग ७५% वनस्पति व जानवर जातियाँ हमेशा के लिये विलुप्त हो गई।
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