परांठा
परांठा भारतीय रोटी का विशिष्ट रूप है। प्रतिदिन के उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीपीय कलेवे में सबसे लोकप्रिय पदार्थ यदि कोई है तो वह परांठा ही है। इसे बनाने की जितनी विधियां हैं वैसे ही हिन्दी में इसके कई रूप प्रचलित हैं जैसे पराठा, परौठा, परावठा, परांठा और परांवठा। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक यह भारतीय रसोई का भाग है और नित्य सवेरे तवे पर सेंके जाते परांठे की लुभावनी सुुुगन्ध भूख बढ़ा देती है। हां स्वास्थ्य की दृष्टि से ये अवश्य वसा से भरपूर होने के कारण सीमित मात्रा में ही उपभोग किये जाने चाहिये।
परांठा लगभग रोटी के जैसे ही बनाया जाता है, अंतर केवल इसकी सिंकाई का है। रोटी को जहां तवे पर सेंकने के उपरांत सीधे आंच पर ही फुलाया जाता है वहीं परांठा केवल तवे पर ही सेंका जाता है। रोटी को बनाने के उपरांत ऊपर से शुद्ध घी लगाया जा सकता है, वहीं परांठे को तवे पर सेंकते समय ही घी व तेल लगा कर सेंका जाता है। भरवां परांठा बनाने के लिए आटा व मैदा मल कर उसकी लोई बेल कर उसमें भरावन भरें, फिर उसे बेल कर तवे पर सेंकें। इसे समताप मिलता रहे इसके लिए इसे ऊपर से निरन्तर घुमा-फिरा कर सेंका जाता है। फुलके के जैसे परांठे की दोनो पर्तें नहीं फूलतीं अपितु अकेेली ऊपरी परत ही फूलती है।
भारत पर्यन्त और विदेशों में भी ये बहुत प्रचलित हैं। दक्षिण भारत में केरल का परांठा प्रसिद्ध है। इसको वहां प्रोट्टा कहते हैं। इसमें अत्यधिक चिकनाई के साथ ढेरों पर्तें होती हैं। परांठे को भारतीय लोग मलेशिया और मॉरीशस तक ले गये, जहां आज इसे फराटा और सिंगापुर में रोटी कनाई या रोटी प्राटा कहते हैं। म्यांमार में इसे पलाता कहते हैं। ट्रिनिडाड एवं टोबैगो में ये अत्यधिक पतले और बहुत बड़े होते हैं और बस्सप-शट कहलाते हैं।